बिहार में NH-31 की चौड़ीकरण: केंद्र सरकार ने मंजूर किए ₹3936 करोड़ के प्रोजेक्ट

बिहार में NH-31 की चौड़ीकरण: केंद्र सरकार ने मंजूर किए ₹3936 करोड़ के प्रोजेक्ट

बिहार के पूर्वी जिलों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट समिति पर आर्थिक मामलों की बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (NH-31) और NH-231 के खगड़िया-पुरनिया खंड को चार लेन का बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह प्रोजेक्ट बिहार में 143.529 किमी लंबा होगा और इसका कुल लागत ₹3,936.05 करोड़ अनुमानित है। सरकारी स्रोतों के अनुसार, यह कार्य BOT (टोल) मोड पर किया जाएगा, जिसका मतलब है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसे बनाया जाएगा और यात्रियों से टोल वसूला जाएगा।

वैसे तो यह निर्णय बुधवार को लिया गया, लेकिन इसके असर सालों तक महसूस किए जाएंगे। पुरानी दो लेन वाली सड़क, जो अक्सर ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का कारण बनती थी, अब आधुनिक चार लेन वाली सुविधा बनने वाली है। यही नहीं, इसमें पुरनिया शहर के लिए एक नया बायपास भी शामिल है।

प्रोजेक्ट के मुख्य विवरण और लागत

आइए संख्याओं को देखें। प्रेस इन्फॉर्मेशन бюरो (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की कुल पूंजीगत लागत ₹3,936.05 करोड़ है। इसमें से सिविल लागत ₹2,467.77 करोड़ और भूमि अधिग्रहण की लागत ₹290.16 करोड़ है। बाकी खर्च अन्य व्यवस्थाओं और प्रबंधन पर जाएंगे।

यह प्रोजेक्ट खगड़िया से शुरू होकर भagalpur, कतिहार और अंत में पुरनिया तक फैला हुआ है। विशेष रूप से, NH-31 के किमी 270.000 से किमी 410.000 तक के खंड पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह रस्ता तेज गति, सुरक्षा और ईंधन की बचत में मदद करेगा।

पुरनिया का नया ग्रीनफील्ड बायपास

इस प्रोजेक्ट का सबसे रोमांचक हिस्सा पुरनिया शहर के लिए बनाया जा रहा 6.729 किमी लंबा 'ग्रीनफील्ड' बायपास है। ग्रीनफील्ड का मतलब है कि यह मौजूदा सड़क के ऊपर नहीं, बल्कि नई जमीन पर बनेगा। इससे शहर के अंदर ट्रैफिक की भीड़ कम होगी और यात्री बिना रुके शहर के बाहर निकल सकेंगे।

मौजूदा स्थिति में, पुरनिया शहर के अंदर से गुजरने वाले ट्रकों और गाड़ियों के कारण भारी जाम होता है। इस बायपास से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि वाहन चलाने का खर्च भी घटेगा। आधिकारिक तौर पर कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट से यात्रा का समय लगभग दो घंटे तक सीमित हो जाएगा।

नौकरी और आर्थिक प्रभाव

नौकरी और आर्थिक प्रभाव

सड़क बनाने का काम शुरू होते ही हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। PIB के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से सीधे तौर पर 32.59 लाख व्यक्ति-दिन (person-days) की नौकरी और अप्रत्यक्ष रूप से 40.55 लाख व्यक्ति-दिन की नौकरी उत्पन्न होगी। यह बिहार के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मजदूरों के लिए एक बड़ा अवसर है।

इसके अलावा, यह सड़क PM गति-शक्ति योजना के तहत 5 आर्थिक नोड्स से जुड़ेगी, जिसमें 1 टेक्सटाइल क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क और 2 फिशरीज़/सीफूड पार्क शामिल हैं। साथ ही, यह 11 लॉजिस्टिक नोड्स जैसे 4 बड़े रेलवे स्टेशनों, 1 एयरपोर्ट और कई राज्य राजमार्गों से जुड़ेगी। इसका मतलब है कि बिहार की कृषि और उद्योग उत्पाद अब तेजी से बाजार तक पहुंचेंगे।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा, "यह एक ऐतिहासिक निर्णय है जो बिहार के विकास को नई गति देगा।" उनकी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि राज्य सरकार इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के साथ देख रही है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 890 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, जबकि अभी तक 770 हेक्टेयर उपलब्ध है।

अगले कुछ महीनों में टेंडर प्रक्रिया और भूमि हासिल करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एक बार काम शुरू होने के बाद, बिहार के पूर्वी हिस्से में परिवहन और व्यापार में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। यह प्रोजेक्ट न केवल यात्रियों के लिए आसान यात्रा सुनिश्चित करेगा, बल्कि区域经济 को भी मजबूत करेगा।

Frequently Asked Questions

यह प्रोजेक्ट कब शुरू होगा?

कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, लेकिन काम शुरू होने में कुछ महीने लग सकते हैं क्योंकि टेंडर प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण को पूरा करना बाकी है। एक बार भूमि तैयार हो गई, तो निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो जाएगा।

यात्रियों को इससे क्या फायदा होगा?

चार लेन वाली सड़क से यात्रा का समय लगभग दो घंटे तक कम हो जाएगा। साथ ही, ट्रैफिक जाम कम होने से ईंधन की बचत होगी और सड़क दुर्घटनाएं भी कम होंगी। पुरनिया का नया बायपास शहर के अंदर की भीड़ से राहत देगा।

क्या इस प्रोजेक्ट पर टोल लगेगा?

हाँ, यह प्रोजेक्ट BOT (Build-Operate-Transfer) टोल मोड पर किया जा रहा है। इसका मतलब है कि निजी कंपनी इसे बनाएगी और कुछ वर्षों तक टोल वसूलकर अपनी लागत वसूलेगी, उसके बाद यह सड़क सरकार के पास चली जाएगी।

इस प्रोजेक्ट से कितनी नौकरियां मिलेंगी?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से सीधे तौर पर 32.59 लाख व्यक्ति-दिन और अप्रत्यक्ष रूप से 40.55 लाख व्यक्ति-दिन की नौकरी उत्पन्न होगी। यह बिहार के स्थानीय मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक बड़ा रोजगार स्रोत है।